'आज़ादी' कहने को तो एक छोटा सा शब्द मगर खुशीयों और आशाओं से भरा हुआ ।
और आज के दौर मे 71 सालों के बाद भी यह आज़ादी एक ख्वाहिश सी लगती है।
--चलो बात करे उन विचारों की ,बात करें संस्कारो सी
अपनी बेटी ,बहन है और दूजों की बाजारू सी
सङक पर सहमी बेटीयां हमारी करती इक फरियाद है
क्या यही हमारी आजादी है,क्या सच मे हम आजाद है?
--चलो बात करे उस बहू की जिसकी दुनिया उसका ससुराल है
अपनो के अत्याचारो से उसका जीना बेहाल है
दहेज की लालच मे उसका पराया घर बर्बाद है
क्या यही उसकी आजादी है,क्या सच मे वो आजाद है?
--हम बात करे गुलामी की जो गौरों की किया करते थे
आज भी कुछ बदला नहीं वो आज भी किया करते हैं
पहले वो आकर करवाते थे अब उनकी जाकर करते हैं
अरे गौरों की क्यूं बात करे अपने भारत को ही लेते हैं
नेताओं को गुलामी अब टेबल के नीचे से जो देते हैं
तो क्या मतलब उस 15 अगस्त का जो आज भी हम गुलाम है
क्या यही हमारी आजादी है ,क्या सच मे हम आजाद है?
--चलो बात करे उस खौफ की जिसकी वजह आतंकवादी है
इमरतों को छोङा नही कई जिंदगीया भी जलादी है
मौका इनको हम ही देते और हम ही इनके साथी है
71 साल से आजाद देश मे क्यूं ये आतंकवाद है
क्या यही हमारी आज़ादी है , क्या सच मे हम आजाद है?
--आजादी चाहिए उस सोच से ,दिमाग मे आई मोच से
खुद को खुद से बदलना हमे न किसी आलोच से
अपनो से कोई लगाव नही है हमे लालच है जायदाद से
क्या यही हमारी आज़ादी है, क्या सच मे हम आजाद है ?
और आज के दौर मे 71 सालों के बाद भी यह आज़ादी एक ख्वाहिश सी लगती है।
--चलो बात करे उन विचारों की ,बात करें संस्कारो सी
अपनी बेटी ,बहन है और दूजों की बाजारू सी
सङक पर सहमी बेटीयां हमारी करती इक फरियाद है
क्या यही हमारी आजादी है,क्या सच मे हम आजाद है?
--चलो बात करे उस बहू की जिसकी दुनिया उसका ससुराल है
अपनो के अत्याचारो से उसका जीना बेहाल है
दहेज की लालच मे उसका पराया घर बर्बाद है
क्या यही उसकी आजादी है,क्या सच मे वो आजाद है?
--हम बात करे गुलामी की जो गौरों की किया करते थे
आज भी कुछ बदला नहीं वो आज भी किया करते हैं
पहले वो आकर करवाते थे अब उनकी जाकर करते हैं
अरे गौरों की क्यूं बात करे अपने भारत को ही लेते हैं
नेताओं को गुलामी अब टेबल के नीचे से जो देते हैं
तो क्या मतलब उस 15 अगस्त का जो आज भी हम गुलाम है
क्या यही हमारी आजादी है ,क्या सच मे हम आजाद है?
--चलो बात करे उस खौफ की जिसकी वजह आतंकवादी है
इमरतों को छोङा नही कई जिंदगीया भी जलादी है
मौका इनको हम ही देते और हम ही इनके साथी है
71 साल से आजाद देश मे क्यूं ये आतंकवाद है
क्या यही हमारी आज़ादी है , क्या सच मे हम आजाद है?
--आजादी चाहिए उस सोच से ,दिमाग मे आई मोच से
खुद को खुद से बदलना हमे न किसी आलोच से
अपनो से कोई लगाव नही है हमे लालच है जायदाद से
क्या यही हमारी आज़ादी है, क्या सच मे हम आजाद है ?

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