इस साल भी तुम्हें नही कह पाए हम
ये साल भी ख्यालों मे गुजर गया
तेरे करीब जाकर तुझसे लिपटना चाहा दिल ने
मगर ये साल भी कुछ फासलों मे गुजर गया
तुम कभी कभी आती और मे रोज इंतजार करता
और ये साल अधूरी मुलाकातों मे गुजर गया
काश तुम्हे कह दिया होता काश मैं इजहार करता
और ये साल भी इन बातों मे गुजर गया
ना तमने समझी खामोशीना मैंने सहारा लफ्जों का लिया
और ये साल भी एक डरे हुए इजहार मे गुजर गया
एक-दूसरे को देखकर हर बार दिल सिर्फ मेरा ही धङका
और ये साल भी एक-तरफा-प्यार मे गुजर गया.....
खैर....
तुम्हारी राह देखने मे इस साल भी ये इंतजार रहेगा
डरा हुआ ही सही इस साल भी ये इजहार रहेगा
तो क्या हुआ तुम मेरे लिए कुछ महसूस नही करती
मगर मेरे दिल मे साल भी ये एक-तरफा-प्यार रहेगा......
-Pankaj luhani✒
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