नील कण्ठ, है प्रचंड
पुत्र जिनके एकदंत
कैलाश के जो राजा है
वही है साधू वही संत
रक्त में सदैव उबाल
क्रोध जिनका है विकराल
काल पर जो राज करे
नाम है उनका महाकाल
शिव है जो जटाधारी
जिनको पूजे हर नर-नारी
उनका हो हर भक्त है
उन्हीं की है सृष्टि सारी
प्याला पीया ज़हर का
सुरज है वो सहर का
भक्तों पर कृपा करे
ज्ञान रहे हर पहर का
मंत्र यही जपे हर कोई
अंबर हो या पाताल हो
जय जय शिव जय जय शिव
जय जय महाकाल हो...
जिनके केशों मे समाहित साक्षात गंगोत्री
उस देव की आज है ये महाशिवरात्रि🙏
पंकज✒
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