आज भी लड़कीयां अपने मन की नहीं कर सकती
आज भी ये रक्षा अपने तन की नहीं कर सकती
आज भी ये कठपुतलीयां मानी जाती है
आज भी ये रचना अपने जीवन की नहीं कर सकती
सङकों पर नोची हुयी मिलती हैं
जो किसी के घर की शहजादी है
क्या अब भी हम आजाद है , क्या यही हमारी आजादी है...?
आज भी ये रक्षा अपने तन की नहीं कर सकती
आज भी ये कठपुतलीयां मानी जाती है
आज भी ये रचना अपने जीवन की नहीं कर सकती
सङकों पर नोची हुयी मिलती हैं
जो किसी के घर की शहजादी है
क्या अब भी हम आजाद है , क्या यही हमारी आजादी है...?
सब नेताओं पर विश्वास आए
कुछ आम आए कुछ खास आए
ये रूपयों के भूखे हैं
इन्हे रिश्वत ही बस रास आए
उनपर आश्रित आबादी है , जो रिश्वतों के आदी है
क्या अब भी हम आजाद है , क्या यही हमारी आजादी है...?
कुछ आम आए कुछ खास आए
ये रूपयों के भूखे हैं
इन्हे रिश्वत ही बस रास आए
उनपर आश्रित आबादी है , जो रिश्वतों के आदी है
क्या अब भी हम आजाद है , क्या यही हमारी आजादी है...?
तुम खरोंच ढूंढते हो यहां जख्मों की कमी नहीं है
मेरे इस देश में बेशरमों की कमी नहीं है
इस देश में बूढ़ों को लावारिस मानते हैं
मेरे इस देश में वृद्धाश्रमों की कमी नहीं है
यहां घरों में छोटों का राज है और फुटपाथ पर दादा-दादी है
क्या अब भी हम आजाद है , क्या यही हमारी आजादी है...?
मेरे इस देश में बेशरमों की कमी नहीं है
इस देश में बूढ़ों को लावारिस मानते हैं
मेरे इस देश में वृद्धाश्रमों की कमी नहीं है
यहां घरों में छोटों का राज है और फुटपाथ पर दादा-दादी है
क्या अब भी हम आजाद है , क्या यही हमारी आजादी है...?
सब रीति-रिवाज हम भूल गए
सब परंपरा हम भूल गए
भारत आजाद कराने को
कौन-कौन मरा हम भूल गए
पाश्चात्य संस्कृति में भूल गए क्या खाकी है क्या खादी है
क्या अब भी हम आजाद है , क्या यही हमारी आजादी है...?
सब परंपरा हम भूल गए
भारत आजाद कराने को
कौन-कौन मरा हम भूल गए
पाश्चात्य संस्कृति में भूल गए क्या खाकी है क्या खादी है
क्या अब भी हम आजाद है , क्या यही हमारी आजादी है...?
खुद को खुद से आजाद करो
ना सोच को यूं बर्बाद करो
खुद ही के कुकर्मों से तुमने खुद में महामारी ला दी है
क्या अब भी हम आजाद है , क्या यही हमारी आजादी है...?
ना सोच को यूं बर्बाद करो
खुद ही के कुकर्मों से तुमने खुद में महामारी ला दी है
क्या अब भी हम आजाद है , क्या यही हमारी आजादी है...?
-Pankaj luhani
Comments
Keep it up...Bravo!!